पंचांग के पाँच अंग
पंचांग का अर्थ है "पाँच अंग"। हिन्दू कैलेंडर का हर दिन पाँच तत्वों से बताया जाता है, और इन्हीं से त्योहार, व्रत और मुहूर्त तय किए जाते हैं।
- तिथि: चंद्र दिवस। चंद्रमा को सूर्य से 12° आगे बढ़ने में जितना समय लगता है, वह एक तिथि है, इसलिए एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं। ये शुक्ल पक्ष (बढ़ता चंद्रमा) और कृष्ण पक्ष (घटता चंद्रमा) में बँटी होती हैं।
- वार: सप्ताह का दिन, हर एक का स्वामी एक ग्रह।
- नक्षत्र: वह चंद्र नक्षत्र जिससे चंद्रमा गुज़र रहा है, 27 में से एक।
- योग: सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से गणना किए गए 27 योगों में से एक।
- करण: तिथि का आधा भाग। कुल 11 करण होते हैं।
आपका स्थान क्यों मायने रखता है
किसी दिन का पंचांग स्थानीय सूर्योदय से गिना जाता है, और सूर्योदय इस पर निर्भर करता है कि आप कहाँ हैं। इसीलिए कैलेंडर आपका स्थान पूछता है: लंदन या टोरंटो में सूर्योदय के समय की तिथि और नक्षत्र पुणे से अलग हो सकते हैं। अपने स्थान के लिए आने वाले त्योहार भी देखें।
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